. *अभंग*
गंगाखेड को जाणा सहज नाही I
बडा कष्ट उठाणा पडता है I
कभी गाडी में कभी मोटर में I
कभी पैदल चलना पडता हैI
कभी सायकल रिक्षा खूब मीले I
कभी युं ही चलना पडता है II०१II
कभी गादी में कभी ताकिया में I
कभी बोरा बिछाना मिळता है I
कभी महाल मिले सोनेको I
कभी सडक पे सोना पडता है II ०२II
कभी पुरी मिले कभी छोले मिलेI
कभी बाशी खाना मिलता है I
कभी मालमलिदा खूब मिले I
कभी युं ही मिलना पडता है II ०३II
कभी माला मिले फुलोंके गले I
कभी निंदाओके दौर चले I
कभी मान मिले सन्मान कभी I
अपमान भी सहन करणा पडता है II ०४II
रचना व गीतकार
*सुधामती नाडे मुरुड*
खरे आहे सद्गुरू दर्शन सुलभ नहि तन मन अर्पण करणा पडता है जय सदगुरू खूप छान
उत्तर द्याहटवाVery nice
उत्तर द्याहटवासदगुरू आपल्या भक्तीची परीक्षा घेवून भक्ती मार्गावर परिपक्व करूनच जीवन उद्धरण्यासाठी मार्गस्थ करतात. म्हणून सदगुरू धामास जाणे सहज नाही हे खरे आहे.
उत्तर द्याहटवाउत्तम रचना